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बीएचयू की भारतीय नारी और सरकार

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में लड़कियों पर किया गया लाठीचार्ज सामान्य लाठीचार्ज नहीं है। यह लाठीचार्ज लड़कियों के आत्मसम्मान को नष्ट करने की मुहिम का हिस्सा है। लड़कियां निरन्तर चलने वाली छेड़खानी और यौन-उत्पीड़न के विरोध में शान्तिपूर्ण धरने पर बैठी थीं।उनके शरीर की स्वायत्तता पर हमला हुआ था ।वे चाहती थीं कि वी सी उनसे मिले और उनकी व्यथा-कथा सुने, क्या यह मांग अनुचित है। क्या सुरक्षा के मसले पर संस्था के मुखिया से मिलने की बात अनुचित है? क्या लाठी ही इसका उपाय है।वी सी लड़कियों की बात सुनकर उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दे सकते थे, इसके बजाय वे लड़कियों से नज़र चुरा रहे थे। इसके पीछे कुछ कारण हैं। ये रिपोर्ट आती रही हैं विश्वविद्यालय में लड़कियों को शाम होते ही हास्टल की बैरकों में बन्द कर दिया जाता है। मोबाइल ,मीट आदि पर पाबंदी है। लड़कियों के नागरिक अधिकारों और छात्र अधिकारों को बर्फ में लगा दिया गया है। विश्वविद्यालय को 'हिन्दुत्व की प्रयोगशाला'में बदल दिया गया है। सुबह-शाम भगवा ध्वज लेकर शाखा सदस्य वहां मार्च करते हैं। इस माहौल में लड़कियों को चुप रहना चाहिए लेक...

RSS और भाजपा ने मिलकर फैलाया fake न्यूज़ का जंजाल

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" इंडिया में फेक न्यूज़ बनाने की फैक्ट्री देखते ही देखते खड़ी हो गयी है । झूठ की ऐसी फैक्ट्रियां ज़्यादातर मोदी भक्त ही चलाते हैं। झूठ की फैक्ट्री से जो नुकसान हो रहा है उसका असर हमारे समाज पर बुरा पड़ेगा आने वाले समय मे । अभी कुछ दिन पहले ही गणेश चतुर्थी थी। उस दिन सोशल मीडिया में एक झूठ फैलाया गया। फैलाने वाले संघ के लोग थे। ये झूठ क्या है ? झूठ ये है कि कर्नाटक सरकार जहां बोलेगी वहीं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी है , उसके पहले दस लाख का डिपाज़िट करना होगा , मूर्ति की ऊंचाई कितनी होगी , इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी , दूसरे धर्म के लोग जहां रहते हैं उन रास्तों से विसर्जन के लिए नहीं ले जा सकते हैं। पटाखे वगैरह नहीं छोड़ सकते हैं। संघ के लोगों ने इस झूठ को खूब फैलाया। ये झूठ इतना ज़ोर से फैल गया कि अंत में कर्नाटक के पुलिस प्रमुख आर के दत्ता को प्रेस बुलानी पड़ी और सफाई देनी पड़ी कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है। ये सब झूठ है। इस झूठ का सोर्स जब हमने पता करने की कोशिश की तो वो जाकर पहुंचा   POSTCARD.IN   नाम की वेबसाइट पर। इसका काम हर दिन फ़ेक न्यू...

जीएसटी और हमारी काँग्रेस की मांगे

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हम कहते है जीएसटी में बुराई नहीं है, किन्तु इसके मौजूदा प्रावधानों में से कुछ में संशोधन किए जाने की जरूरत है। हम जीएसटी के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसको लागू करने से पहले व्यावहारिक सोच के साथ यह समझने की जरूरत है कि इससे व्यापारियों के साथ ही राजस्व की भी हानि होगी। हमारी समस्याओं को विचारधीन रखते हुए इसमें कुछ बदलाव करने जाने की जरूरत है।  मूलतः जीएसटी पास होने से पहले काँग्रेस की तीन बहुत महत्वपूर्ण मांगे थी :- भारतीय राष्ट्रिए कांग्रेस चाहती है कि सरकार जीएसटी की दर की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत तय कर दे, और इस दर को संविधान संशोधन में शामिल कर दे, परंतु मोजूड़ा एनडीए सरकार ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया। हम इसके अलावा सरकार द्वारा प्रस्तावित एक प्रतिशत अतिरिक्त कर को भी हटवाना चाहते है, जो वस्तुओं को राज्यों की सीमा से आर-पार लाने या ले जाने पर देना होगा, इस प्रस्ताव का उद्देश्य था कि उन राज्यों को भी मुआवज़ा मिल सके, जो उत्पादन पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। कांग्रेस की तीसरी बड़ी मांग है कि वित्तमंत्री उस परिषद के अधिकारों को बढ़ा दें, जो राज्यों के बीच राजस्व बंटव...

किसानों हितों के खिलाफ काम कर रही है ‘सूट बूट की सरकार‘

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मध्य प्रदेश के सेहोर जिले में गंभीर वित्तीय बाधाओं ने एक किसान को अपनी दो बेटियों से मदद लेने के लिए मजबूर किया क्योंकि परिवार के पास बैल खरीदने के लिए पैसा नहीं था। बसंतपुर पांगरी गांव के रहनेवाले सरदार कहला ने दावा किया कि उनके पास खेतों के लिए बैल खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। "मेरे पास फसलने के लिए बैल खरीदने या लेने का पर्याप्त पैसा नहीं है। उन्होंने कहा, मेरी दोनों बेटियों ने वित्तीय संकट के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। जिला जनसंपर्क अधिकारी (डीपीआरओ) आशीष शर्मा ने कहा कि प्रशासन इस मामले पर विचार कर रहा है। "किसान को निर्देश दिया गया है कि वह ऐसी गतिविधियों के लिए बच्चों का इस्तेमाल न करे। उन्होंने सरकारी योजनाओं में जो भी मदद की हो, प्रशासन उस पर विचार कर रहा है। " मगर यह किस्से तो आम हो गये है।  एक किसान कौन है? एक व्यक्ति जो भोजन के लिए जीवित बढ़ती फसल बना देता है? लेकिन, एक किसान कौन है? क्या कौशल, योग्यता, लाइसेंस, भूमि खिताब, औपचारिक अनुबंध एक व्यक्ति के पास होना चाहिए? "किसान" पर विचार करके हम समझते हैं कि वह कैसा दिखता है, वह कहां ...

डिजिटल सुरक्षा के बिना डिजिटल इंडिया हो सकता है क्या ?

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‘‘जब मैं वहां खड़ा था तब भी मैंने जीएसटी का समर्थन किया और जब मैं यहां बैठा हूं (ट्रेजरी बेंच और विपक्ष के बैंचों का हवाला देते हुए) तब भी मैं जीएसटी का समर्थन करता हूं। जब मैं वहां था तब मैंने आधार का समर्थन किया और जब मैं यहां हूं तो मैंने आधार का समर्थन किया। मैंने वहां भूमि अधिग्रहण विधेयक का समर्थन किया और मैं यहां भी भूमि अधिग्रहण विधेयक का समर्थन करता हूं। इन तीनों मामलों पर, विपक्ष के पूर्व नेता और उनकी पार्टी ने अपना मन बदल लिया ज बवे यहां से वहां गये। इसलिए, मुझे सदन के नेता से मेरी बौद्धिक अखंडता के प्रमाण पत्रों की आवश्यकता नहीं है।’’ 2016 में कांग्रेस पार्टी की तरफ से राज्य सभा में आधार विधेयक पर चर्चा करते हुए ये बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कही थीं। 2012 में भारत के तत्त्कालीन प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इससे पहले कहा था, ‘‘हमारी सरकार प्रशासन में पारदर्शिता लाने और बेईमानी पर लगाम लगाने के लिये नयी तकनीक का उपयोग करना चाहती है। आधार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’ कांग्रेस पार्टी भी आधार पर अपने रुख पर कायम रही। हमेशा से ही हमारा मानना रहा...

मोदी सरकार के 3 वर्ष ओर घोटालों की लम्बी होती फ़ेहरिस्त

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तीन साल पहले 26 मई के दिन ही पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। तीन साल पूरे होने पर हमारी मोदी सरकार ने नया नारा दिया है। घोटालों की मार को ख़त्म करने का नारा देते हुए आयी भाजपा सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद भी घोटाले और वित्तीय अनियमितताएँ जारी हैं। आज़ादी के बाद से बननी शुरू हुई घोटालों की फ़ेहरिस्त में इस बार भी कई बड़े घोटाले शामिल हुए हैं। जहाँ एक तरफ देश की कमान सम्भाल रहे नरेन्द्र मोदी ‘मेक इन इण्डिया’, ‘स्किल इण्डिया’ जैसे नारे देकर सबके विकास का राग अलाप रहे हैं, वहीं इसी राग के साथ देश के नेता-नौकरशाह जनता की गाढ़ी कमाई से ऐय्याशी के बाद भी अपनी धुन में घोटाले किये जा रहे हैं। बीजेपी हमेशा खुद को देशभक्त साबित करती है और जनता को बेवकूफ बनाती है। जरा नजर डालते हैं भाजपा के घोटाले की लिस्ट पर। नोट - ये सिर्फ कुछ ही घोटालो की झलक है। 1- कारगिल ताबूत घोटाले, कारगिल उपकर दुरूपयोग घोटाला। 2- दूरसंचार प्रमोद महाजन - घोटाले (रिलायंस) 3-अरुण शौरी निजी खिलाड़ियों को बेलआउट पैकेज यूटीआई घोटाले 4- साइबर स्पेस इन्फोसिस लिमिटेड घोटाले 5- पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी आवंट...

कायर पाकिस्तान की नापाक हरकते उससे भारी पड़ेगी

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पाकिस्तान अपनी कायराना हरकतों से बाज नहीं आ रहा, सरहद पर लगातार अपनी ना'पाक'हरकतों को अंजाम दे रहा है। एलओसी पर लगातार फायरिंग से भारतीय जवानों के हौसले पस्त नहीं कर पाया तो अब अपनी फितरत पर उतर आया है। धोखे से भारतीय जवानों पर वार कर रहा है।इस बार उसने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में भारतीय जवानों पर हमला किया।  हमले में दो जवान शहीद हो गए हैं। शहीद हुए जवानों में एक सेना का और एक बीएसएफ का है।  जानकारी के मुताबिक जवानो के साथ बर्बरता भी की गई है, उनके शवों को क्षत-विक्षत किया गया है। बताया जा रहा है कि वारदात आज सुबह की है, जब भारतीय सेना के जवान कृष्णा घाटी सेक्टर में  एलओसी पर पेट्रोलिंग कर रहे थे इसी दौरान पाकिस्तान की बार्डर एक्‍शन टीम यानी बैट के जवानों ने घात लगाकर हमला किया। बैट के दरींदों ने बर्बरतापूर्ण हरकत करते हुए जवान के शवों को क्षत-विक्षत किया है। यह तो सभी मान रहे हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसा काम भारतीय सेना ने कोई पहली बार नहीं किया था। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में भी इस तरह की कार्रवाई हुई थी। हां उसका ढोल नहीं पीट...

MCD चुनाव से शिक्षा एक जरूरी मुद्दा , स्कूलों में शिक्षकों के आधे पद है खाली

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एमसीडी चुनावों के दौरान वैसे तो सभी ज़्यादातर पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर वोटरों को लुभाने की जुगत मे लगी हैं लेकिन स्कूली बच्चों के बारे में सिर्फ काँग्रेस सोचती है। यही वजह है कि जब दिल्ली सरकार और एमसीडी ने स्कूलों में 33 हज़ार शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं की तो हाई कोर्ट को 3 हफ्तों मे इस प्रक्रिया को शुरू करने के सख्त आदेश देने पड़े। दरअसल दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों मे 27 हज़ार शिक्षकों की नियक्ति होनी है। जो फ़िलहाल काम कर रहे शिक्षकों की संख्या का लगभग 50 फीसदी हैं। यानी दिल्ली सरकार के स्कूलों में 50 फ़ीसदी शिक्षक रखे बिना ही बच्चों को शिक्षा दी जा रही है. ये हाल तब है जब दिल्ली सरकार खुद मियां मिट्ठू बनकर शिक्षा को सरकारी स्कूलों में बेहतर करने का दावा करती आई है। अब सोचिये कि जब किसी स्कूल मे आधे शिक्षक होंगे ही नहीं तो पढ़ाई भला कैसे होगी। एमसीडी के स्कूलों की हालत भी दिल्ली सरकार के स्कूलों जैसी ही है। यहां तीनों एमसीडी में कुल मिलाकर 6 हज़ार शिक्षकों के पद खाली हैं। बीजेपी और आम आदमी पार्टी जब एमसीडी चुनावों के दौरान अपनी उपलब्धियों को गिनाने में...

MCD चुनाव 2017 के मायने

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2007 के चुनावों दिल्ली नगर निगम एक हुआ करता था, 2012 में इसके तीन हिस्से कर दिए गए। दिल्ली नगर निगम दिल्ली के 11 जिलों में से 8 जिले कवर करती आते हैं बाकि के जिले नई दिल्ली म्यूनिसिपल काउंसिल यानि एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोन्मेंट बोर्ड देखता है।  एमसीडी के अंतर्गत दिल्ली का 1397 किलोमीटर का एरिया आता है। दिल्ली में तीनों एमसीडी मिलाकर कुल 272 वार्ड हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने 136 वार्डों (50 प्रतिशत सीट ) को महिलाओं के आरक्षित कर दिया है। MCD चुनाव के मद्देनजर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने 140 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है।  उन्होंने यह लिस्ट अपने ट्विटर हैंडल से जारी किया है।  272 सीटों पर होने वाले MCD चुनाव के लिए कांग्रेस पूरी जोर लगा रही है और अच्छे नतीजो की उम्मीद है। उम्मीद है कि कांग्रेस की ओर से पांच बड़े नेताओं के अनुभव का इस्तेमाल MCD चुनाव में होगा।  कूड़ा-कचरा के प्रबंधन का प्लान पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश पेश करेंगे।  नगर निगम के स्कूलों और अस्पतालों को सुधारने का खाका शशि थरूर और सलमान खुर्शीद तैयार करेंगे।  साथ ...

दिल्ली में प्रदुषण की समस्या, बचने के उपाय और जरूरी कदम

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वर्तमान में प्रदुषण एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में उभरता जा रहा है। मोजूदा "आप" सरकार की नीतियो ने परिस्थिति ओर बिगाड़ दी है।  बढ़े प्रदूषण का स्तर बच्चो ही नहीं बड़ो को भी बहुत परेशान कर देता है। बढ़े हुए प्रदूषण के कारण हवा दिन प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है जिसके वजह से लोगो में कई तरह की श्वास संबंधी बीमारियों होने लगी है। इस विषय में सेंटर फोर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSI) का कहना है की यदि जल्द ही इस प्रदूषण पर काबू पाने के उपाय शुरू नहीं किये गए तो हालात अधिक खतरनाक हो सकते है। दिल्ली में प्रदुषण का ये कहर पिछले कुछ सालो से जारी है जबसे "आप" सरकार के अपात्र मंत्री सत्ता मे आये है आपातकालीन स्थिति बनी हुई है।  जिस वजह से दिनचर्या बहुत प्रभावित होने लगा है। दिल्ली का प्रदुषण बनता जा रहा है खतरा :- यूँ तो दिल्ली में प्रदूषण का स्तर हमेशा ही बढ़ा रहता है लेकिन इस बार प्रदूषण ने सभी रिकार्ड्स तोड़ दिए है। माना जा रहा है लगभग 17 साल बाद धुंध और प्रदुषण का इतना प्रकोप देखने को मिला है जिसके पीछे कही न कही "आप" सरकार की नीतियो की अनदेखी और मनमर्जी जिम्मेदार...

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 132 वर्ष (1885-2017)

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 132 वर्ष (1885-2017) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस , अधिकतर कांग्रेस के नाम से प्रख्यात हैं। कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में 1885 में हुई थी ; इसके संस्थापकों में ए ओ ह्यूम (थियिसोफिकल सोसाइटी के प्रमुख सदस्य) , दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे। 19 वी सदी के आखिर में और शुरूआती से लेकर मध्य 20 वी सदी में , कांग्रेस भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में , अपने 1.5 करोड़ से अधिक सदस्यों और 7 करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ , ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन  विरोध में एक केन्द्रीय भागीदार बनी थी। 1947 में आजादी के बाद , कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। आज़ादी से लेकर 2016 तक , 16 आम चुनावों में से , कांग्रेस ने 6 में पूर्ण बहुमत जीता हैं और 4 में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया ; अतः , कुल 49 वर्षों तक वह केन्द्र सरकार का हिस्सा रही। भारत में , कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं ; पहले जवाहरलाल नेहरू ( 1947-1965) थे और हाल ही में मनमोहन सिंह ( 2004-2014) थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास दो विभिन्न काल से गुज़रता ह...