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राहुल गांधी जी के सोमनाथ मंदिर मे जाने से बीजेपी मे क्यूँ होने लगी टेंशन ?

इन सब का एक बहुत बड़ा कारण है । पहले जनसंघ और अब भाजपा दोनों एक ही सिक्के के तो पहलू हैं क्यूँ की पहले जनसंघ हिंदुओं के लिए कुछ नहीं कर पाया और अब भाजपा कुछ नहीं कर पा रही है । इसके एक नहीं कई सारे उदाहरण है ।  जिस सोमनाथ मंदिर का उदाहरण भाजपा दे रही है । उस सोमनाथ मदिर को काँग्रेस के नेताओं द्वारा काँग्रेस के शासन काल मे ही बनवाया गया । जिस वक़्त सोमनाथ मंदिर बन रहा था उस वक़्त कोई भी जनसंघ का नेता मंदिर के लिए सामने नहीं आया क्यूँ की सोमनाथ मंदिर का मुद्दा संघ के हाथों जा चुका था । काँग्रेस ने मंदिर का निर्माण कराकर जनसंघ के वोटों के धुर्विकरण के लिए धार्मिक भावनाओ को भड़काने का मौका जनसंघ के हाथों से जा चुका था । वहीं काँग्रेस नेताओं ने मंदिर के निर्माण में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और धीरे धीरे जनसंघ की राजनीति खत्म हो गयी। ऐसा ही उदाहरण अयोध्या में राम मंदिर का है । जिस राम मदिर का नाम लेकर पुराना जनसंघ और आज की भाजपा वोटों की खेती करती आ रही है । आपकी जानकारी के लिए बता दूँ उसी राम मंदिर के ताले स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने खुलवाए थे । उससे पहले तो न भाजपा ...

गुजरात चुनाव - राहुल गाँधी के सामने अमित शाह और मोदी की हालत यूँ ही पतली नहीं है

गुजरात चुनाव - राहुल गाँधी के सामने अमित शाह और मोदी की हालत यूँ ही पतली  नहीं है   loading... गुजरात चुनाव से देश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है उसको और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है राहुल गाँधी जी ने। राहुल गाँधी जी की नवसर्जन यात्रा के पश्चात मोदी और अमित शाह की नींद उडी हुई है। शहर हो या गांव सभी जगह राहुल जी को अपार समर्थन मिला। अपनी इस २५०० किमी की यात्रा के दौरान उन्होंने हर वर्ग का ख्याल रखा। वह आदिवासियों , व्यापारी , पाटीदार , पिछड़ों, दलितों आदि के साथ घुल मिलकर उनकी समस्याओं को सुना। वो कारण जिनसे भाजपा की नींद उडी हुई है।  राहुल गाँधी जी को सुनने के लिए गुजरात में उमड़ी भीड़ नोट बंदी और जीएसटी को मुद्दा बनाया पाटीदार आरक्षण आंदोलन  कांग्रेस के नेताओं द्वारा भाजपा विरोधियों को एकजुट करना  हार्दिक , जिग्नेश , अल्पेश की जोड़ी का बीजेपी के खिलाफ मोर्चा संभालना  राहुल जी का अलग अलग संगठन के लोगों से मिलना (व्यापारी , मछुआरे , आदिवासी , पाटीदार आदि) २२ साल से सत्ता में रहने के कारण सत्ता विरोधी लहर. हर वर्ग में किसी न किसी कारण से भाजपा ...

भारतीय जनता पार्टी के वादे और उनके इरादे

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यदि भाजपा के समर्थक हैं तो ख़ुद से नीचे लिखे सवाल पूछिए और यदि आपको जवाब ना मिले तो मेरे जबाब हाज़िर हैं। साथ में शर्म हो तो अपनी सरकार से ये सवाल ज़रूर पूछिए..!!! तीन साल में भाजपा द्वारा किया गया क्रियाकर्म। प्र 1- कितने करोड़ युवाओं को रोजगार दिया? उ - बाबा जी का ठुल्लू। कुछ युवाओं को राहुल जी को गाली देने के लिए रोज़गार दे रखा है और बाकि के नाकारा भक्त जो किसी की सुनते नहीं वो बेचारे चुपचाप पड़े पड़े कांग्रेस को कोसते रहते हैं। कांग्रेस ने ७० सालों से कुछ नहीं किया। प्र 2- गंगा मैया कितनी साफ हुई? उ - जनता के १७०० करोड़ उमा भारती ने चाय समोसे में उड़ा दिए। बाकि के जय शाह खा गया। रही बात गंगा मैया की तो :- गंगा मैया रो रही बीजेपी के काम से। सारा पैसा खा गए मेरी सफाई के नाम पे। प्र 3- मेक इन इंडिया का क्या परिणाम रहा? उ - मेक इन इंडिया बदल कर मेड इन चाइना हो गया है। प्रधान सेवक के साथ साथ भक्त १० रूपये की चाइनीज झालर का विरोध करते हैं पर बेचारे सेल्फी मेड इन चाइना फ़ोन से लेते हैं। प्र 4- कितने दागी नेता जेल गए? उ - भक्तों से ये सवाल बिलकुल मत पूछना क्यूंकि...

आखिर भारत के प्रधानमंत्री मोदी गुजरात से क्यों डर रहे हैं। जानने के लिए पढ़ें-

ये आपने कब देखा था कि एक राज्य के चुनाव और उसके नतीजों में लगभग सवा महीने का फासला रखा गया हो? चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश में आठ नवंबर को चुनाव कराने का ऐलान किया है, लेकिन नतीजों का ऐलान 18 दिसंबर को किया जाएगा। कोई भी सामान्य बुद्धि रखने वाला शख्स भी समझ सकता है कि ऐसा क्यों किया गया है? विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे वाली फोटो पर क्लिक करें। क्या चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार की सहूलियतों के हिसाब से चुनाव की तारीखें तय करेगा? गुजरात में भी दिसंबर में ही चुनाव होने हैं। होना तो यह चाहिए था कि चुनाव आयोग दोनों राज्यों के चुनाव की तारीख एक साथ ऐलान करता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजों की तारीख 18 दिसंबर करने का मतलब यह है कि गुजरात के चुनाव भी 18 दिसंबर से पहले ही कराए जाएंगे और उसके चुनाव नतीजों की तारीख भी 18 दिसंबर ही रखी जाए तो कोई ताज्जुब नहीं होगा। विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे वाली फोटो पर क्लिक करें। गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताबड़तोड़ रैलियां, कई परियोजनाओं का उद्घाटन आदि बहुत कुछ कह देते हैं। इसका मतलब क्या है? क्या गुजरात में भाजपा क...

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी जी के बढ़ते कदम, तिलमिलाती हुई भाजपा

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जिस तरीके से बदलते राजनीती के दौर में भाजपा द्वारा चलाये गए फेक प्रोपोगेंडा धीरे धीरे जनता के सामने आते जा रहे हैं उतनी ही ज्यादा भाजपा की घबराहट बढ़ती जा रही है। जिस तरीके से भाजपा ने राहुल गाँधी को पप्पू या उनका मजाक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन अब भाजपा द्वारा चलाये जा रहे इस तरीके के फेक न्यूज़ जंजाल की राहुल जी ने काट ढूंढ ली है जो की भाजपा की परेशानी का सबब बनी ही है। पिछले कुछ दिनों में राहुल जी द्वारा सोशल मीडिया (ट्विटर )द्वारा भाजपा की नीतियों पर जो कड़ा प्रहार किया है वो भाजपा की चिंता का सबब बना हुआ है। जहाँ एक तरफ अमित शाह के बेटे का मुद्दा कोई भी मीडिया सगठन उठाने के हिम्मत नहीं रखता वहीँ राहुल गाँधी इस मुद्दे को बार बार उठा रहे हैं जो की उनकी निडरता को दर्शाता है। मुद्दे चाहे जो भी हों जैसे की तमिल फिल्म मार्सेल हो, भारतीय अमेरिकी निति हो , जी एस टी , नोट बंदी , या भारत में एक अजीब से डर का माहौल बना हुआ हो। इन सभी मुद्दों पर राहुल जी द्वारा भाजपा को कठघरे में खड़ा करना और फिर जनता द्वारा उसको हाथों हाथ लेना राहुल जी की बढ़ती लोकप्रियता के महज़ ...

बीएचयू की भारतीय नारी और सरकार

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में लड़कियों पर किया गया लाठीचार्ज सामान्य लाठीचार्ज नहीं है। यह लाठीचार्ज लड़कियों के आत्मसम्मान को नष्ट करने की मुहिम का हिस्सा है। लड़कियां निरन्तर चलने वाली छेड़खानी और यौन-उत्पीड़न के विरोध में शान्तिपूर्ण धरने पर बैठी थीं।उनके शरीर की स्वायत्तता पर हमला हुआ था ।वे चाहती थीं कि वी सी उनसे मिले और उनकी व्यथा-कथा सुने, क्या यह मांग अनुचित है। क्या सुरक्षा के मसले पर संस्था के मुखिया से मिलने की बात अनुचित है? क्या लाठी ही इसका उपाय है।वी सी लड़कियों की बात सुनकर उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दे सकते थे, इसके बजाय वे लड़कियों से नज़र चुरा रहे थे। इसके पीछे कुछ कारण हैं। ये रिपोर्ट आती रही हैं विश्वविद्यालय में लड़कियों को शाम होते ही हास्टल की बैरकों में बन्द कर दिया जाता है। मोबाइल ,मीट आदि पर पाबंदी है। लड़कियों के नागरिक अधिकारों और छात्र अधिकारों को बर्फ में लगा दिया गया है। विश्वविद्यालय को 'हिन्दुत्व की प्रयोगशाला'में बदल दिया गया है। सुबह-शाम भगवा ध्वज लेकर शाखा सदस्य वहां मार्च करते हैं। इस माहौल में लड़कियों को चुप रहना चाहिए लेक...

RSS और भाजपा ने मिलकर फैलाया fake न्यूज़ का जंजाल

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" इंडिया में फेक न्यूज़ बनाने की फैक्ट्री देखते ही देखते खड़ी हो गयी है । झूठ की ऐसी फैक्ट्रियां ज़्यादातर मोदी भक्त ही चलाते हैं। झूठ की फैक्ट्री से जो नुकसान हो रहा है उसका असर हमारे समाज पर बुरा पड़ेगा आने वाले समय मे । अभी कुछ दिन पहले ही गणेश चतुर्थी थी। उस दिन सोशल मीडिया में एक झूठ फैलाया गया। फैलाने वाले संघ के लोग थे। ये झूठ क्या है ? झूठ ये है कि कर्नाटक सरकार जहां बोलेगी वहीं गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी है , उसके पहले दस लाख का डिपाज़िट करना होगा , मूर्ति की ऊंचाई कितनी होगी , इसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी , दूसरे धर्म के लोग जहां रहते हैं उन रास्तों से विसर्जन के लिए नहीं ले जा सकते हैं। पटाखे वगैरह नहीं छोड़ सकते हैं। संघ के लोगों ने इस झूठ को खूब फैलाया। ये झूठ इतना ज़ोर से फैल गया कि अंत में कर्नाटक के पुलिस प्रमुख आर के दत्ता को प्रेस बुलानी पड़ी और सफाई देनी पड़ी कि सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है। ये सब झूठ है। इस झूठ का सोर्स जब हमने पता करने की कोशिश की तो वो जाकर पहुंचा   POSTCARD.IN   नाम की वेबसाइट पर। इसका काम हर दिन फ़ेक न्यू...

जीएसटी और हमारी काँग्रेस की मांगे

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हम कहते है जीएसटी में बुराई नहीं है, किन्तु इसके मौजूदा प्रावधानों में से कुछ में संशोधन किए जाने की जरूरत है। हम जीएसटी के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसको लागू करने से पहले व्यावहारिक सोच के साथ यह समझने की जरूरत है कि इससे व्यापारियों के साथ ही राजस्व की भी हानि होगी। हमारी समस्याओं को विचारधीन रखते हुए इसमें कुछ बदलाव करने जाने की जरूरत है।  मूलतः जीएसटी पास होने से पहले काँग्रेस की तीन बहुत महत्वपूर्ण मांगे थी :- भारतीय राष्ट्रिए कांग्रेस चाहती है कि सरकार जीएसटी की दर की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत तय कर दे, और इस दर को संविधान संशोधन में शामिल कर दे, परंतु मोजूड़ा एनडीए सरकार ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया। हम इसके अलावा सरकार द्वारा प्रस्तावित एक प्रतिशत अतिरिक्त कर को भी हटवाना चाहते है, जो वस्तुओं को राज्यों की सीमा से आर-पार लाने या ले जाने पर देना होगा, इस प्रस्ताव का उद्देश्य था कि उन राज्यों को भी मुआवज़ा मिल सके, जो उत्पादन पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। कांग्रेस की तीसरी बड़ी मांग है कि वित्तमंत्री उस परिषद के अधिकारों को बढ़ा दें, जो राज्यों के बीच राजस्व बंटव...

किसानों हितों के खिलाफ काम कर रही है ‘सूट बूट की सरकार‘

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मध्य प्रदेश के सेहोर जिले में गंभीर वित्तीय बाधाओं ने एक किसान को अपनी दो बेटियों से मदद लेने के लिए मजबूर किया क्योंकि परिवार के पास बैल खरीदने के लिए पैसा नहीं था। बसंतपुर पांगरी गांव के रहनेवाले सरदार कहला ने दावा किया कि उनके पास खेतों के लिए बैल खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। "मेरे पास फसलने के लिए बैल खरीदने या लेने का पर्याप्त पैसा नहीं है। उन्होंने कहा, मेरी दोनों बेटियों ने वित्तीय संकट के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। जिला जनसंपर्क अधिकारी (डीपीआरओ) आशीष शर्मा ने कहा कि प्रशासन इस मामले पर विचार कर रहा है। "किसान को निर्देश दिया गया है कि वह ऐसी गतिविधियों के लिए बच्चों का इस्तेमाल न करे। उन्होंने सरकारी योजनाओं में जो भी मदद की हो, प्रशासन उस पर विचार कर रहा है। " मगर यह किस्से तो आम हो गये है।  एक किसान कौन है? एक व्यक्ति जो भोजन के लिए जीवित बढ़ती फसल बना देता है? लेकिन, एक किसान कौन है? क्या कौशल, योग्यता, लाइसेंस, भूमि खिताब, औपचारिक अनुबंध एक व्यक्ति के पास होना चाहिए? "किसान" पर विचार करके हम समझते हैं कि वह कैसा दिखता है, वह कहां ...

डिजिटल सुरक्षा के बिना डिजिटल इंडिया हो सकता है क्या ?

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‘‘जब मैं वहां खड़ा था तब भी मैंने जीएसटी का समर्थन किया और जब मैं यहां बैठा हूं (ट्रेजरी बेंच और विपक्ष के बैंचों का हवाला देते हुए) तब भी मैं जीएसटी का समर्थन करता हूं। जब मैं वहां था तब मैंने आधार का समर्थन किया और जब मैं यहां हूं तो मैंने आधार का समर्थन किया। मैंने वहां भूमि अधिग्रहण विधेयक का समर्थन किया और मैं यहां भी भूमि अधिग्रहण विधेयक का समर्थन करता हूं। इन तीनों मामलों पर, विपक्ष के पूर्व नेता और उनकी पार्टी ने अपना मन बदल लिया ज बवे यहां से वहां गये। इसलिए, मुझे सदन के नेता से मेरी बौद्धिक अखंडता के प्रमाण पत्रों की आवश्यकता नहीं है।’’ 2016 में कांग्रेस पार्टी की तरफ से राज्य सभा में आधार विधेयक पर चर्चा करते हुए ये बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कही थीं। 2012 में भारत के तत्त्कालीन प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इससे पहले कहा था, ‘‘हमारी सरकार प्रशासन में पारदर्शिता लाने और बेईमानी पर लगाम लगाने के लिये नयी तकनीक का उपयोग करना चाहती है। आधार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’ कांग्रेस पार्टी भी आधार पर अपने रुख पर कायम रही। हमेशा से ही हमारा मानना रहा...

मोदी सरकार के 3 वर्ष ओर घोटालों की लम्बी होती फ़ेहरिस्त

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तीन साल पहले 26 मई के दिन ही पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। तीन साल पूरे होने पर हमारी मोदी सरकार ने नया नारा दिया है। घोटालों की मार को ख़त्म करने का नारा देते हुए आयी भाजपा सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद भी घोटाले और वित्तीय अनियमितताएँ जारी हैं। आज़ादी के बाद से बननी शुरू हुई घोटालों की फ़ेहरिस्त में इस बार भी कई बड़े घोटाले शामिल हुए हैं। जहाँ एक तरफ देश की कमान सम्भाल रहे नरेन्द्र मोदी ‘मेक इन इण्डिया’, ‘स्किल इण्डिया’ जैसे नारे देकर सबके विकास का राग अलाप रहे हैं, वहीं इसी राग के साथ देश के नेता-नौकरशाह जनता की गाढ़ी कमाई से ऐय्याशी के बाद भी अपनी धुन में घोटाले किये जा रहे हैं। बीजेपी हमेशा खुद को देशभक्त साबित करती है और जनता को बेवकूफ बनाती है। जरा नजर डालते हैं भाजपा के घोटाले की लिस्ट पर। नोट - ये सिर्फ कुछ ही घोटालो की झलक है। 1- कारगिल ताबूत घोटाले, कारगिल उपकर दुरूपयोग घोटाला। 2- दूरसंचार प्रमोद महाजन - घोटाले (रिलायंस) 3-अरुण शौरी निजी खिलाड़ियों को बेलआउट पैकेज यूटीआई घोटाले 4- साइबर स्पेस इन्फोसिस लिमिटेड घोटाले 5- पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी आवंट...

कायर पाकिस्तान की नापाक हरकते उससे भारी पड़ेगी

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पाकिस्तान अपनी कायराना हरकतों से बाज नहीं आ रहा, सरहद पर लगातार अपनी ना'पाक'हरकतों को अंजाम दे रहा है। एलओसी पर लगातार फायरिंग से भारतीय जवानों के हौसले पस्त नहीं कर पाया तो अब अपनी फितरत पर उतर आया है। धोखे से भारतीय जवानों पर वार कर रहा है।इस बार उसने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में भारतीय जवानों पर हमला किया।  हमले में दो जवान शहीद हो गए हैं। शहीद हुए जवानों में एक सेना का और एक बीएसएफ का है।  जानकारी के मुताबिक जवानो के साथ बर्बरता भी की गई है, उनके शवों को क्षत-विक्षत किया गया है। बताया जा रहा है कि वारदात आज सुबह की है, जब भारतीय सेना के जवान कृष्णा घाटी सेक्टर में  एलओसी पर पेट्रोलिंग कर रहे थे इसी दौरान पाकिस्तान की बार्डर एक्‍शन टीम यानी बैट के जवानों ने घात लगाकर हमला किया। बैट के दरींदों ने बर्बरतापूर्ण हरकत करते हुए जवान के शवों को क्षत-विक्षत किया है। यह तो सभी मान रहे हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसा काम भारतीय सेना ने कोई पहली बार नहीं किया था। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में भी इस तरह की कार्रवाई हुई थी। हां उसका ढोल नहीं पीट...